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4 जुल॰ 2020

राजस्थान में विभिन्न कृषि क्रांतियां - Raj GK Topic

राजस्थान में विभिन्न कृषि क्रांतियां  - 

                   भारत या राजस्थान में विभिन्न कृषि क्रांतियों  ( Agriculture  Revolutions in Rajasthan  ) के बारें में जानकारी प्राप्त करने के लिए भारत में शुरू की गयी  विभिन्न कृषि योजनाओं के बारे में जानना आवश्यक है। भारत में कृषि विकास के लिए कृषि क्रांति का बहुत महत्त्व है।   

भारत में आर्थिक सुधारों के लिए विभिन्न क्षेत्रों जैसे कृषि ,पशुपालन व दुग्ध उत्पादन  , मत्स्य पालन , तिलहन (सरसों  आदि ) उत्पादन  ,आलू  उत्पादन  व अन्य क्षेत्रों में विकास  के लिए विभिन्न   अभियान , योजनाओं की शुरुआत की गयी उन्हें विभिन्न  कृषि क्रांतियों के नाम से भी जोड़ा गया है।


              यहाँ विभिन्न Objectives प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए राजस्थान में विभिन्न कृषि क्रांतियाँ बिंदु पर सारगर्भित जानकारी देने का प्रयास किया गया है। महत्त्वपूर्ण कृषि क्रांतियाँ इस प्रकार हैं -


राजस्थान में विभिन्न कृषि क्रांतियाँ
राजस्थान में विभिन्न कृषि क्रांतियाँ

हरित क्रांति -  


                हरित क्रांति की शुरुआत 1966-67 में प्रारंभ करने का श्रेय नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर नॉर्मन बोरलॉग (अमेरिका ) को जाता है। भारत में हरित क्रांति का जनक डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन को जाता है। इसका संबंध खाद्यान्न उत्पादन से है। 


हरित क्रांति से तात्पर्य देश की सिंचित एवं असिंचित क्षेत्रों में अधिक उपज देने वाले संकर तथा बौने  बीजों के उपयोग से फसल उत्पादन में तीव्र वृद्धि करना है। 


हरित क्रांति का प्रथम चरण 1966 - 67 से 1980 -1981 तक चला। दूसरा चरण 1990 से चला। हरित क्रांति की उपलब्धियों को कृषि में तकनीकी एवं संस्थागत परिवर्तन एवं उत्पादन में हुए सुधार के रूप में इस प्रकार से देखा जा सकता है- 


कृषि में तकनीक एवं संस्थागत सुधार  - 


रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग 

उन्नतशील बीजों के प्रयोग में वृद्धि 

पौध संरक्षण 

सिंचाई सुविधाओं का विकास 

बहुफसली कार्यक्रम 

आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रयोग 

कृषि सेवा केंद्रों की स्थापना 

कृषि उद्योग निगम 

मृदा ( मिट्टी ) परीक्षण 

भूमि संरक्षण 

कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान 

  • कृषि उत्पादन में सुधार - 

उत्पादन तथा उत्पादकता में वृद्धि 

कृषि के परंपरागत स्वरूप में परिवर्तन 

कृषि वस्तुओं  में वृद्धि 

अग्रगामी तथा प्रतिगामी संबंधों में मजबूती 


हरित क्रांति का प्रभाव - 

 भारत देश में हरित क्रांति के फलस्वरूप कुछ फसलों के उत्पादन में पर्याप्त वृद्धि हुई है। खाद्यान्नों के आयात में कमी आई है और कृषि के परंपरागत स्वरूप में भी परिवर्तन आया है। लेकिन हरित क्रांति का प्रभाव कुछ विशेष फसलों  गेंहू और चावल तक ही सीमित रहा।  जैसे गेहूं , ज्वार ,बाजरा अन्य फसलों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। 

 
श्वेत क्रांति - white Revolution

             श्वेत क्रांति की शुरुआत 13 जनवरी 1970 को हुई। इसके सूत्रधार डॉ वर्गीज कुरियन को माना गया है। 1970 में ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम चला गया था। दुग्ध क्रांति या ऑपरेशन फ्लड भारत की ऐसी योजना है  जिससे भारत में दूध की कमी को दूर किया जा सके। इसे श्वेत क्रांति भी कहते हैं।

  पशुपालन से जुड़ा एक बहुत लोकप्रिय उद्यम है जिसके अंतर्गत दुग्ध उत्पादन उसके प्रसंस्करण और खुदरा बिक्री के लिए किए जाने वाले कार्य आते हैं। भारत में ऑपरेशन फ्लड (श्वेत क्रांति) का जनक डॉ वर्गीज कुरियन को कहा जाता है ‌। 

 
भारत में कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए खाद्यान्न के साथ अन्य क्षेत्रों में भी लगातार अन्य कृषि क्रांति लागु की गयी। भारत में श्वेत क्रांति और हरित क्रांति के बाद कई कृषि क्रांति लागु की गयी जिनके बारे में सामान्य जानकारी इस प्रकार है -


नीली क्रांति का संबंध मत्स्य उत्पादन से है। नीली क्रांति मिशन का उद्देश्य मछुआरे और मछली उत्पादक किसानों की आर्थिक समृद्धि प्राप्त करना है। 


भूरी क्रांति का संबंध खाद्य प्रसंस्करण  ( Food Processing ) से है। खाद्य प्रसंस्करण से तात्पर्य  मानव या पशुओं के उपभोग के लिए कच्चे संघटकों को खाद्य पदार्थ में बदलने या खाद्य पदार्थों को अन्य रूपों में  बदलने की विधियों या तकनीकों से है।


स्वर्णिम क्रांति का संबंध फल व सब्जी के उत्पादन से है।


गोल क्रांति का संबंध आलू उत्पादन से है। इसे राउंड क्रांति भी कहते हैं।

गुलाबी क्रांति का सम्बन्ध झींगा मछली पालन से है।

रजत क्रांति अंडों के उत्पादन से संबंधित है।

बादामी क्रांति का संबंध मसाला उत्पादन से है।

पीली क्रांति - पीली क्रांति का संबंध तिलहन ( सरसों ) उत्पादन से है। हरित क्रांति की अगली कड़ी के  चरण में विकास की जो योजना बनाई गई उसे पीली क्रांति नाम दिया गया इसके अंतर्गत तिलहन के उत्पादन में वृद्धि लाने के लिए नवीन रणनीति अपनाई गई थी।


सुनहरी क्रांति फल -फूलों के उत्पादन से संबंधित है।



इंद्रधनुषी क्रांति -राष्ट्रीय कृषि नीति 2000 को इंद्रधनुषी क्रांति कहा गया है। इसमें कृषि व उसे संबंधित क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा दिया गया है। यह पूर्व में प्रचलित सभी क्रांतियों का समग्र रूप होने से एकीकृत क्रांति के नाम से भी जानी जाती है। 

लाल क्रांति टमाटर में मांस उत्पादन से संबंधित है।


                                 इस प्रकार आज हमने राजस्थान में विभिन्न कृषि क्रांतियाँ ( Various Agriculture Revolutions in Rajasthan )  ( कृषि , पशुपालन एवं खाद्यान्न से संबंधित विभिन्न विकास योजनाओं ) जिन्हें विभिन्न क्रांतियों का नाम दिया गया है कि बारे में प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी जानकारी प्राप्त की है। 

                        आशा है राजस्थान में विभिन्न कृषि क्रांतियों से संबंधित जानकारी आपको अच्छी लगी है। अपने साथियों को शेयर करना ना भूले। भारत और राजस्थान में कृषि क्रांतियां (  rajasthan me vibhinn krishi krantiyan ) से संबंधित लेख को महत्वपूर्ण बनाने के लिए आपके सुझाव आमंत्रित हैं।