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8 जुल॰ 2020

राजस्थान के प्रमुख जनपद - rajgktopic

राजस्थान के प्रमुख जनपद - ( Rajasthan ke parmukh janpad) 

राजस्थान में जनपद शासन व्यवस्था प्राचीन समय में प्रचलित थी। राजस्थान का कुछ क्षेत्र जनपद व्यवस्था में सम्मिलित था। वैदिक सभ्यता के विकास क्रम में राजस्थान में अनेक जनपदों का उदय देखने को मिलता है। राजस्थान के जनपद भी कालांतर में महाजनपदों में बदल गए थे।

राजस्थान में जनपदों के बाद छठी शताब्दी ईसा पूर्व उत्तर भारत में अनेक विस्तृत और शक्तिशाली स्वतंत्र राष्ट्र / राज्य की स्थापना हुई इन्हें महाजनपदों का नाम दिया गया। महाजनपदों का अर्थ राज्य अथवा प्रशासनिक इकाई होता है। महाजनपद जनपदों से शक्तिशाली प्रशासनिक क्षेत्र थे। 

उत्तर वैदिक काल में हमें विभिन्न जनपदों का अस्तित्व दिखाई देता है। छठी शताब्दी ईसा पूर्व के प्रारंभ में उत्तर भारत में सार्वभौमिक सत्ता का बिल्कुल अभाव था।





राजस्थान के प्रमुख जनपद
राजस्थान के प्रमुख जनपद


संपूर्ण भारत अनेक स्वतंत्र राज्य में विभक्त था। बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तरनिकाय एवं जैन ग्रंथ भगवती सूत्र के अनुसार भारत में 16 महाजनपद विद्यमान थे। इन 16 महाजनपदों में दो प्रकार के राज्य थे पहला राजतंत्र तथा दूसरा गणतंत्र। 
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कोशल , वत्स , अवंती एवं मगध उसमें सर्वाधिक शक्तिशाली राजतंत्र थे। छठी शताब्दी ईसा पूर्व में अनेक गणतंत्र का भी अस्तित्व था जैसे कपिलवस्तु के शाक्य, कुशीनारा के मल, वैशाली के लिच्छवि और मिथिला के विदेह। 

यहां केवल राजस्थान के प्रमुख जनपद विषय के बारे में जानकारी देने का प्रयास किया गया है। 

राजस्थान के प्रमुख जनपद -
  •  मत्स्य जनपद 
  • शिवि जनपद 
  • शूरसेन जनपद 
  • जांगल जनपद आदि राजस्थान के प्रमुख जनपद थे। 
राजस्थान में भी वैदिक सभ्यता के विकास क्रम में जनपदों का उदय हो गया था। पंजाब की अनेक जातियां जैसे मालव , शिवी , अर्जुनायन आदि जातियाँ अपने साहस और शौर्य के लिए जानी जाती थी।

लेकिन जब यूनानी आक्रमण हुआ तब यह जातियां राजस्थान में आकर रहने लगी और यहीं पर निवास करने लगी साथ ही राजस्थान के पूर्वी भाग में शासन व्यवस्था का रूप बदल गया। जनपदीय शासन व्यवस्था का सूत्रपात इन्हीं के आगमन द्वारा शुरू हुआ। 

राजस्थान के प्रमुख जनपद ( Rajasthan ke Pramukh Janpad )इस प्रकार थे - 

मत्स्य जनपद -


अलवर का क्षेत्र तथा वर्तमान जयपुर के आसपास का क्षेत्र मत्स्य महाजनपद में शामिल था। मत्स्य जनपद का विस्तार चंबल नदी के पास की पहाड़ियों से लेकर सरस्वती नदी के जांगल क्षेत्र (वर्तमान बीकानेर ) तक था। वर्तमान अलवर और भरतपुर जिले का कुछ हिस्सा भी इस जनपद के अंतर्गत आता था।

 महाभारत काल में मत्स्य जनपद पर विराट नामक राजा का शासन था, जिन्होंने जयपुर में विराटनगर बसाया था। वर्तमान में यह 'बैराठ' नाम से जाना जाता है। मत्स्य जनपद की राजधानी विराटनगर (वर्तमान बैराठ ) थी । मत्स्य जनपद भारतवर्ष के प्रमुख महाजनपदों में से एक था जिस पर मीणा राजाओं का शासन था।


वर्तमान राजस्थान का उत्तरी पूर्वी क्षेत्र मत्स्य जनपद में आता था आज भी मीणा जाति के लोग क्षेत्र में बहुत अधिक पाए जाते हैं। वर्तमान राजस्थान के अलवर - जयपुर - भरतपुर और दौसा जिले मत्स्य जनपद  की सीमा क्षेत्र में आते थे। 

मत्स्य शब्द संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ मीन या मछली होता है। भारत की सबसे प्राचीन जातियों में से एक जनजाति मीणा भी है। भगवान विष्णु के 10 वें अवतार को मत्स्य अवतार के रूप में माना जाता है। मत्स्य भगवान के नाम पर ही इस महाजनपद का नाम मत्स्य महाजनपद रखा गया था। 

महाभारत काल में पांडवों ने अज्ञातवास के अंतिम वर्ष  मत्स्य जनपद की राजधानी विराटनगर में ही बिताया था। मत्स्य शब्द का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। 

शिवि जनपद -


शिवि जनपद का प्रारंभिक उल्लेख सिक्कों पर किया गया है। शिवि जनपद का प्रारम्भिक स्रोत सिक्के ही हैं।  ऋग्वेद के अनुसार राजा सुशिन / सुदास ने शिवी राजा को अन्य जातियों के 10 राजाओं के साथ युद्ध में पराजित किया था। शिवि जनपद की राजधानी शिवपुर थी लेकिन इसकी पहचान पाकिस्तान के शोरकोट नामक स्थान से की जाती है। 

 शिवी आदि जातियां राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र के आस - पास निवास करने लगे थी। यह शिवी जनपद मेवाड़ प्रदेश (वर्तमान चित्तौड़गढ़) को कहा गया है जो बाद में मेदपाट के नाम से प्रसिद्ध हुआ था । चित्तौड़गढ़ के पास स्थित मध्यमिका नगरी शिवि जनपद की राजधानी थी। 

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शूरसेन जनपद -


शूरसेन देश प्राचीन काल में राजस्थान में जनपद था। शूरसेन जनपद की राजधानी मथुरा थी। आधुनिक बृज क्षेत्र में महाजनपद स्थित था। महाभारत के अनुसार यहां यदुवंशियों का शासन था। वसुदेव के पुत्र भगवान श्री कृष्ण का संबंध शूरसेन जनपद से था।

राजस्थान के भरतपुर- धौलपुर तथा करौली जिले के अधिकांश भाग शूरसेन जनपद के अंतर्गत ही आते थे। राजस्थान की अलवर जिले का पूर्वी भाग में इसी जनपद के अंतर्गत आता था। 


जांगल जनपद -


महाभारत काल के समय राजस्थान के वर्तमान बीकानेर और जोधपुर जिले- जांगल देश कहलाते थे। जांगल प्रदेश की राजधानी अहीछत्रपुर थी। वर्तमान में यह नागौर के नाम से जाना जाता है। बीकानेर के राजा भी इसी जंगल प्रदेश के स्वामी होने के कारण स्वयं को जंगलधर बादशाह कहते थे। बीकानेर राज्य के राजचिह्न में भी 'जय जांगलधर बादशाह' लिखा हुआ मिलता है। 

कालांतर में जनपदों से ही महाजनपदों का उदय हुआ। जनपद महाजनपदों की अपेक्षा छोटे भू - भाग पर शासन का क्षेत्र था। उत्तर भारत में जो विस्तृत और शक्तिशाली स्वतंत्र राज्य स्थापित हुए उन्हें महाजनपदों की संज्ञा दी गई थी। 

भारत में कुल 16 महाजनपद विद्यमान थे। महाभारत , बौद्ध साहित्य एवं चाणक्य के अर्थशास्त्र से महाजनपदों के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।  मगध महाजनपद जिसकी राजधानी राजगृह /पाटलिपुत्र थी सबसे शक्तिशाली महाजनपदों में से था।

मौर्य काल में राजस्थान अपर जनपद में आता था कुरु जनपद वर्तमान उत्तरी अलवर इसका प्रमुख क्षेत्र था इस जनपद की राजधानी इंद्रप्रस्थ थी। 

राजस्थान के जनपद से सम्बन्धित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर -

  • राजस्थान के प्रमुख जनपदों में मत्स्य जनपद ,शिवि जनपद ,शूरसेन जनपद ,जांगल जनपद आदि थे। 
  • 16 महाजनपदों में दो प्रकार राज्य थे पहला राजतंत्र तथा दूसरा गणतंत्र। 
  • मत्स्य जनपद की राजधानी विराटनगर (वर्तमान बैराठ ) थी। यह ग्रामीण सभ्यता से सम्बंधित राजस्थान की प्राचीन सभ्यता  का स्थान भी था । अशोक का भाब्रू शिलालेख बैराठ से ही प्राप्त हुआ था । राजस्थान में  बौद्ध सभ्यता के प्राचीन अवशेष यहीं से प्राप्त हुए थे ।
  • कुरु जनपद की राजधानी इंद्रप्रस्थ थी। 
  • मगध जनपद की राजधानी पहले राजगृह फिर पाटलिपुत्र बनाई गयी थी। 
  • भारत में कुल 16 महाजनपद विद्यमान थे।
  •  राजस्थान के जनपद मत्स्य जनपद ,शिवि जनपद ,शूरसेन जनपद ,जांगल जनपद बाद में महाजनों में बदल गए थे। 
  • महाभारत काल के समय राजस्थान के वर्तमान बीकानेर और जोधपुर जिले- जांगल देश कहलाते थे।
  •  जांगल प्रदेश की राजधानी अहीछत्रपुर थी।
  • वर्तमान नागौर जिले को जनपद काल में अहिछत्रपुर नाम से जाना जाता था। 

इस प्रकार इस लेख में राजस्थान के प्रमुख जनपदों के बारे में सरल तरीके से सारगर्भित जानकारी देने का प्रयास किया गया है। जानकारी अच्छी है तो साथियों के साथ अवश्य शेयर करें। 


3 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

बहुत ही सारगर्भित और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण।

Unknown ने कहा…

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए.........बहुत ही महत्वपूर्ण सामग्री है इसे आप जारी रखें

Praveen kumar ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी दी धन्यवाद